Monday, March 5, 2018

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्

प्रातःकाल में दिनदर्शिका अर्थात कैलेंडर की ओर ध्यान गया और देखा रामनवमी अर्थात भगवान श्री राम का जन्मदिन निकट आ रहा है. इस से कुछ महीनों पहले घटी एक घटना का स्मरण हुआ.

रात्रि के भोजन के कुछ समय पश्चात पलंग पर लेटे लेटे बेटा कहने लगा की पिताजी मै नहीं सोऊंगा, नींद नहीं आ रही है. वो आप कभी कभी गाना सुन रहे थे वो फिरसे लगाईये, थोडी देर सुनूंगा. बहुत अच्छा है, ऐसा गाना तो कोई गा नही सकता." छोटा है, मेरे समझ के अनुसार वह कहना चाह रहा था कि बहुत अनुठा गाना है.

वैसे वो कोई गाना नहीं था, तुलसीदासजी लिखित रामस्तुती "श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्" थी. मै जो सुन रहा था उसे गायकों ने थोडा तेज गति से गाया था. केवल २ मिनट की होगी. मैने जैसे ही वो लगाई, समाप्त होने से पहले ही मुख पर समाधान के भाव लिये बेटेजी एकदम शांती से सो गये थे.

बहुत अचरज हुआ, इस कारण कि अगर वो सोना नहीं चाहता तो नहीं सोता, चाहे कितनी भी नींद आ रही हो.

कुछ दिनों मे बेटेजी को इसका मराठी में अर्थ बता दिया. रामस्तुती का अर्थ जानकर बेटेजी को भी बडा आनंद आया.

मेरा मानना है हम बच्चों को ऐसी हमारे भगवान, उनके अवतार, तथा ऐतिहासिक व्यक्तियों एवं संस्कृती से जुडी कहानियां, स्तोत्र, या गाने सुनाते रहना चाहीए क्योंकि इस प्रकार के ऑडियो/विज्युअल संस्कार आज के समय में बच्चों मे मन पर गहरा असर करते हैं. फिर न कोई वामी इन पर असर कर पायेगा न अधर्मी.

का कही?!

© मंदार दिलीप जोशी
फाल्गुन कृ. ४, शके १९३९

No comments:

Post a Comment